प्राइम वीडियो वेब सीरीज माराडोना : ब्लेस्ड ड्रीम : डिएगो के जीवन के हर रंग है इसमें ! 


ख़ास है और वर्थ वाच है हर प्रोफेशनल प्लेयर के लिए खेल चाहे सिर्फ "खेला" ही क्यों जो कोई भी खेल हो ! यूँ तो माराडोना के ऊपर अब तक अनगिनत किताबें लिखी जा चुकी हैं, अनेकों डॉक्युमेंट्रीज़ भी आ चुकी हैं लेकिन मौजूदा वेब सीरीज इस मायने में ख़ास है कि उनके जन्म से लेकर मृत्यु तक की कहानी को शामिल किया गया है।  

माराडोना ने २५ नवंबर २०२० को अपने निधन से पहले इस वेब सीरीज के अनुबंध पर हस्ताक्षर किया था।  आज इस वेब सीरीज को मिल रहे वर्ल्ड वाइड रिस्पांस को देखकर हिंदी की एक कहावत स्मरण हो आती है ," हाथी मरा भी तो नौ लाख का !" वेब उनके जीवन की हर छोटी बड़ी घटना को पोर्ट्रे करती है, उनके जीवन के तमाम स्याह पहलुओं को भी बेबाकी से दर्शाती है फिर भले ही साल १९८६ वर्ल्ड कप का उनसे जुड़ा विवाद हो या उनकी ड्रग्स की और दीगर हेल्थ प्रॉब्लम हो या उनकी रंगीनियां हों, अडल्ट्री हो या उनके स्वयं के परिवार का खासकर मां द्वारा स्वार्थवश या पुत्रप्रेम में उनकी हरकतों को प्रश्रय देना  ! 

हालांकि माराडोना के फैंस उन्हें फुटबॉल का गॉड मानते हैं ! वे सही भी हैं क्योंकि महान खिलाड़ी पेले के साथ एक अच्छी टीम भी थी जब ब्राजील वर्ल्ड कप जीता था लेकिन डिएगो ने तो अर्जेंटीना के लिए वर्ल्ड कप अपने दम पर जीता था। निःसंदेह माराडोना पर बनी  बायोपिक वेब सीरीज फुटबॉल लवर्स को तो पसंद आएगी ही, व्यूअर्स भी स्पोर्ट्स के प्रोफेशनल ग्लैमर जनित बुराइयों से रूबरू होंगे ! फिर भी वाजिब सवाल एक है जो घुमड़ता है क्या सफलतम खिलाड़ी तमीज भूल जाता है ? सिर्फ माराडोना ही क्यों, कई महानतम खिलाड़ियों के बारे में सुनने को मिला है ! शायद सफलता का गुरूर सर चढ़कर बोलता है ! आखिर कंट्रोवर्सियल फुटबॉलर कहलाना भी किसी तमगे से कम थोड़े ना है !       

शो बनाया है तो डॉक्यूमेंट्री सरीखी नहीं रखी जा सकती; सीरीज रोचक और आकर्षक बनें इसीलिए  क्रिएटिव लिबर्टी लेते हुए कई काल्पनिक पल गढ़े गए हैं  परंतु वे वास्तविकता को कंट्रीब्यूट ही करते हैं। कुल मिलाकर शो ने मेराडोना को बखूबी जीवंत किया है। उनके बाल्यकाल को, उनकी परवरिश को भी समुचित विस्तार मिला है। एपिसोड दर एपिसोड में उनके स्पोर्ट्स करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को कवर किया गया है, उनके जीवन में ड्रग्स और घोटालों की वजह से हुए विवादों को, उनका चोटों से उबरना, परिवार और अपने फैंस से उनका जुड़ाव,  उनकी बेबाकी आदि आदि बखूबी दिखाया गया है और ऐसा पूरी ईमानदारी के साथ किया गया है ! तभी तो एक महानतम खिलाड़ी ने जीवन में जो कृत्य किये उससे घृणा होती है क्योंकि उन्होंने खुद किये थे ! समझिये जरा उनके उच्छृंखल कृत्यों से घिन आती है तो दीवानगी की हद तक उनपर प्यार भी उमड़ता है ! शायद माराडोना इसी सिंड्रोम या अंतर्द्वंद्व के शिकार थे कि उन्होंने तमाम ऑड्स किये चूंकि उन्हें मालूम था जब तक वे जीत रहे हैं सब कुछ ठीक रहेगा लेकिन जिस दिन से वे हारने लगेंगे लोग उन्हें मार डालेंगे ! कब एक गैर जिम्मेदार और मचलता लड़का , जिसकी हर साँस फुटबॉल के लिए ही चलती थी और इसीलिए उसके टैलेंट और क्षमता में तो कभी कमी नजर नहीं आयी, संगत में आकर एय्याशी और नशे की चकचौंध गलियों में खो गया, शो में कुछ भी छिपाया नहीं गया है। वजह की बात करें तो सबकुछ समय का फेर ही तो था कि सबसे प्रिय दोस्त को हटाकर जिसे मैनेजर बनाया उसी ने उसे बदनाम गलियों में धकेल दिया !

पूरी वेब सीरीज बावजूद दस एपिसोडों के कहीं भी ढीली नहीं पड़ती, हर पल टेम्पो बना रहता है ; ऐसा टीम के बेहतरीन रिसर्च वर्क के कारण संभव हो पाया है। एक लीजेंड फुटबॉल प्लेयर के साथ साथ उसके जीवन की हर परत खुलती है ! माराडोना के जीवन के कई रंग थे। एक बेहतरीन फुटबॉलर , आशिक मिजाज, नशेड़ी और भ्रष्ट, उनके जीवन के कई पहलू थे और इन सभी को  तथ्यों के साथ वेब सीरीज में बहुत ही शानदार तरीके से पिरोया गया है।  

और मेकर्स की मेहनत रंग लायी है तो इसका एक मुख्य कारण बेहतरीन कास्टिंग भी है। तमाम कलाकारों का चयन बहुत सोच-समझकर किया गया है।  डिएगो के बचपन से लेकर अंतिम समय तक के रोल के लिए अलग-अलग कलाकार कास्ट किए गए हैं.और बेशक सभी ने बहुत ही शानदार अभिनय किया है। उनके फेस से लेकर बॉडी लैंग्वेज तक, सबकुछ माराडोना की तरह ही लगता है। उनके जीवन के बाद के समय का किरदार कर रहे एक्टर जुआन पालोमिनो ने तो जैसे जान ही डाल दी है। उनको देखकर ऐसे लगता है, जैसे साक्षात माराडोना अभिनय कर रहे हैं। 

वेब स्पेनिश भाषा में हैं और हर एपिसोड में स्पेनिश मेलोडी युक्त म्यूजिक मन मोह लेता है। बॉलीवुड की हिंदी फिल्मों में फिल्मकारों ने तो जब मौका मिला तब स्पैनिश धुनों को अडॉप्ट किया है ; याद कीजिये  'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा'  का गाना " ना ए समझा ना मैं जाना जो भी तुमने मुझसे कहा है सेनोरिटा " और अमिताभ की ग्रेट गैंबलर का चर्चित और सुमधुर गाना "  दो लफ्जों की है दिल की कहानी - ला ला ला ला ला आ ...... मोरे मियो दो बे साइतो !" कोई आश्चर्य नहीं होगा आने वाले समय में इस वेब के म्यूजिक का बॉलीवुड की फिल्मों में एडॉप्शन हो ! 

निःसंदेह  फुटबॉल के लिए ब्लेस्ड ड्रीम ही था माराडोना ! दुनिया के फुटबॉल प्रेमी माराडोना को फुटबॉल का गॉड मानते हैं और इसी गॉड ने १९८६ के फीफा वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल मैच में इंग्लैंड के खिलाफ दागे गए अपने गोल को " La mano de Dios" यानी "द हैंड ऑफ़ गॉड"  कहकर डिस्क्राइब किया था। चूंकि तब वीडियो फोटोग्राफी टेक्नोलॉजी उपलब्ध नहीं थी और रेफरी  की नजरें धोखा खा गई थी, अर्जेंटीना ने मैच जीता और अपने वर्ल्ड कप का मार्ग प्रशस्त किया था। जो हुआ सो हुआ लेकिन डिएगो की निश्छलता ही थी कि बाद में  उन्होंने  स्वीकारा , " the goal was scored a little with his head, and a little with the hand of God". 

वेब सीरीज वर्थ वाच है , हाँ , बिंज वाच ना कर  एक एक कर हर एपिसोड हर सप्ताह देखें  लेकिन एक एपिसोड एक बार में ही जरूर देखें !  हाँ , ओटीटी कल्चर का कंपल्सन कहें या कंटेंट की असलियत, न्यूडिटी और फ़ाउल लैंग्वेज की भरमार है सो वांछित सावधानी जरूर बरतें ! 'वाच विथ फॅमिली इन ड्राइंग रूम ' से परहेज ही रखें !     

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